Govardhan Puja Aaj : आज का दिन गोवर्धन पूजा के नाम — बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में सुबह से ही मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत रूप की पूजा बड़े उत्साह के साथ की जा रही है। इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्तूबर 2025, बुधवार को मनाई जा रही है, और कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के अवसर पर भक्तों ने श्रद्धा से पूजा-अर्चना की।
Govardhan Puja 2025 aaj गोवर्धन पूजा का महत्व
Govardhan Puja Aaj को ‘अन्नकूट उत्सव’ भी कहा जाता है। यह पर्व उस दिव्य लीला की स्मृति में मनाया जाता है जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था। श्रीकृष्ण ने उस दिन लोगों को यह संदेश दिया कि प्रकृति, गौमाता और अन्नदाता का आदर ही सच्ची भक्ति है।
इसलिए, आज भी हर घर, मंदिर और गाँव में इस दिन गोवर्धन पर्वत का प्रतीक स्वरूप बनाकर Govardhan Puja Aaj की जाती है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।
बिहार में गोवर्धन पूजा 2025 की झलक
बिहार के हर जिले में आज सुबह से ही पूजा की तैयारियाँ जोरों पर थीं। राजधानी पटना, गया, सीवान, समस्तीपुर, सिवान, छपरा और मधुबनी जैसे स्थानों पर भक्तों ने गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई और उसे फूलों, दूर्वा और दीपों से सजाया।
कई स्थानों पर सामूहिक भजन-कीर्तन हुए, मंदिरों में घंटों तक आरती गूंजी और श्रद्धालु “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष में डूबे रहे।
ग्राम्य इलाकों में महिलाओं ने घर के आंगन में गोवर्धन पर्वत का स्वरूप बनाकर परिवार सहित पूजा की। हर घर में आज दूध, दही, मक्खन, मिठाई और अन्नकूट के व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित किए गए।
खेसारी लाल यादव बोले – “गौसेवा ही सच्ची आराधना”
लोकप्रिय अभिनेता और गायक खेसारी लाल यादव ने भी इस अवसर पर बिहारवासियों को गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि,
“गौमाता हमारे जीवन का आधार हैं। अगर हम उनका आदर और सेवा करें, तो यही हमारी सबसे बड़ी पूजा है। गौसेवा ही सच्ची आराधना है।”
उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर खूब साझा किया जा रहा है, और कई जगहों पर गौशालाओं में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
Govardhan Puja Aaj गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष गोवर्धन पूजा के लिए प्रातःकाल का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है।
तिथि: 22 अक्तूबर 2025 (बुधवार)
शुभ मुहूर्त: प्रातः 6:26 बजे से 8:42 बजे तक
परिक्रमा और भोग समय: सुबह से दोपहर तक
इस मुहूर्त में गोवर्धन पूजा करना अत्यंत मंगलकारी और फलदायी माना गया है।
गोवर्धन पूजा की संपूर्ण विधि
1. स्थान की तैयारी
Govardhan Puja Aaj के लिए घर के आंगन या साफ जगह का चयन करें। उस स्थान को जल से धोकर पवित्र करें। भूमि पर हल्दी और गोबर का लेप लगाएँ, और पूजा के लिए चौकी या चौक बनाएं।
2. गोवर्धन पर्वत का निर्माण
गोबर से पर्वत की आकृति बनाएं। यह गोवर्धन पर्वत का प्रतीक माना जाता है। कई जगह भक्त इसमें छोटे-छोटे जानवरों, गायों, पेड़ों और घरों की आकृति भी जोड़ते हैं।
पर्वत के ऊपर हल्दी, चंदन, फूल और दूर्वा चढ़ाएं। दीपक जलाकर आरती की तैयारी करें।
3. पूजन सामग्री
गोबर या मिट्टी
पुष्प, दूर्वा, बेलपत्र
दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल
चावल, मिठाइयाँ, फल
दीपक और अगरबत्ती
4. गोवर्धन पूजा कथा
Govardhan Puja Aaj शुरू करने से पहले गोवर्धन कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। कथा में वर्णन आता है कि जब इन्द्र ने बारिश के रूप में गोकुलवासियों को दंड देने की ठानी, तो श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सात दिन तक वर्षा से सबकी रक्षा की। इसके बाद ब्रजवासियों ने भगवान की आराधना के रूप में इस पर्व की शुरुआत की।
5. आरती और अन्नकूट
पूजा के बाद आरती करें —
“जय जय गिरिराज धरणीधरा…”
भक्तगण अन्नकूट का भोग लगाते हैं जिसमें 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) शामिल किए जाते हैं।
भोग लगाने के बाद प्रसाद सभी में बाँटा जाता है।
6. गोवर्धन परिक्रमा
कई स्थानों पर गोवर्धन परिक्रमा करने की परंपरा है। जो लोग मथुरा-वृंदावन नहीं जा सकते, वे अपने गाँव या घर में गोवर्धन स्वरूप की सात बार परिक्रमा करते हैं।
गोवर्धन पूजा में क्या करें (Do’s)
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें – पवित्रता बनाए रखें।
गोबर और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करें – यही पूजा का मुख्य प्रतीक है।
अन्नकूट बनाएं और दूसरों को बाँटें – दान पुण्य प्राप्त होता है।
गायों की सेवा करें – उन्हें चारा, रोटी, गुड़ खिलाना शुभ माना जाता है।
भक्ति भाव से कथा सुनें – परिवार सहित भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करें।
प्रकृति की पूजा करें – जल, वायु, पर्वत और अन्न के प्रति आभार व्यक्त करें।
गोवर्धन पूजा में क्या न करें (Don’ts)
शुद्धता का अभाव न रखें – बिना स्नान या अशुद्ध अवस्था में पूजा न करें।
गौमाता को अपशब्द या चोट न पहुँचाएँ – यह अशुभ माना जाता है।
मांस, मदिरा या नशे से दूर रहें – यह दिन पूर्णतः सात्विकता के लिए है।
प्लास्टिक या रासायनिक रंगों से सजावट न करें – केवल प्राकृतिक सजावट अपनाएँ।
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भोजन का अपव्यय न करें – अन्नकूट का प्रसाद ससम्मान ग्रहण करें।
Govardhan Puja Aaj अन्नकूट पर्व का अर्थ
गोवर्धन पूजा के साथ ही अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। “अन्न” यानी अन्नदाता और “कूट” यानी ढेर।
इस दिन विभिन्न प्रकार के पकवानों का अन्नकूट बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है।
यह पर्व इस भावना का प्रतीक है कि जीवन का हर अन्न दाना ईश्वर की कृपा है, और इसे बांटने में ही सच्चा आनंद है।
गोवर्धन पूजा से मिलने वाली सीख
प्रकृति का सम्मान करें – यही श्रीकृष्ण का संदेश था।
गायों का संरक्षण करें – गौमाता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं।
दान और सहयोग करें – किसी ज़रूरतमंद को अन्न या कपड़े दें।
समुदाय में प्रेम बनाए रखें – सामूहिक पूजा से एकता मजबूत होती है।
विनम्र रहें – भगवान श्रीकृष्ण ने सिखाया कि शक्ति का प्रदर्शन नहीं, सेवा का भाव बड़ा है।
लोक आस्था और परंपरा का संगम Govardhan Puja Aaj
गोवर्धन पूजा भारतीय ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग है। इस दिन किसान, व्यापारी, महिलाएँ और बच्चे सभी उत्सव की भावना में डूबे रहते हैं। गायों को नहलाकर, सिंगार करके, उन पर मालाएँ पहनाई जाती हैं।
बिहार और पूर्वी भारत में यह दिन खेती, पशुपालन और पर्यावरण के प्रति आभार जताने का अवसर बन जाता है।
धार्मिक दृष्टि से शुभ फल Govardhan Puja Aaj धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोवर्धन पूजा करने से:
घर में सुख-समृद्धि आती है,
अन्न और धन की वृद्धि होती है,
गौमाता और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है,
और परिवार में एकता बनी रहती है।
समापन विचार
गोवर्धन पूजा हमें यह सिखाती है कि भक्ति केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हमारी आस्था, सेवा और प्रकृति के प्रति सम्मान में है।
जैसा कि खेसारी लाल यादव ने कहा —
“गौसेवा ही सच्ची आराधना है।”
इसलिए इस दिन सिर्फ पूजा ही नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी गौमाता, प्रकृति और अन्नदाता का आदर करना ही सच्चा धर्म है।
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